Knowledge

tatr tan buddhisanyogan labhate paurvadehikam Shlok MEaning, Anuvaad, Bhavarth in Hindi

 🕉श्रीमद्भगवद्गीता दैनिक स्वाध्याय 🕉

 [अध्याय 6 – ध्यानयोग ]

श्र्लोक ४३

तत्र तं बुद्धिसंयोगं लभते पौर्वदेहिकम् |

यतते च ततो भूय: संसिद्धौ कुरुनन्दन

शब्दार्थ:- 

(तत्र) वहाँ 

(तम्) वह

 (पौर्वदेहिकम्) पहले शरीरमें संग्रह किये हुए 

(बुद्धिसंयोगम्) बुद्धिके संयोगको अनायास ही 

(लभते) प्राप्त हो जाता है 

() और

 (कुरुनन्दन) हे कुरुनन्दन!

 (ततः) उसके पश्चात् 

(भूयः) फिर 

(संसिद्धौ) परमात्माकी प्राप्तिरूप सिद्धिके लिये 

(यतते) प्रयत्न करता है

अनुवाद:-  

वहाँ उस पहले शरीर में संग्रह किए हुए बुद्धि-संयोग को अर्थात समबुद्धिरूप योग के संस्कारों को अनायास ही प्राप्त हो जाता है और हे कुरुनन्दन! उसके प्रभाव से वह फिर परमात्मा की प्राप्तिरूप सिद्धि के लिए पहले से भी बढ़कर प्रयत्न करता है।

Facebook Comments
error: Content is protected !!